background img

Latest

अल्लाह का वजूद – साइंस की दलीलें

यह किताब अल्लाह के गुणों यानि तौहीद को साइंस की मदद से समझने की एक छोटी सी कोशिश है। अक्सर उसके गुणों को न समझने की वजह से खुदा के वजूद से ही इंकार कर दिया जाता है। जबकि अगर उन्हें इंसानी अक्ल की कसौटी पर परख लिया जाये तो यह तय है कि इन्सान खुदा के वजूद से कभी इंकार नहीं कर सकता।


आमतौर पर कोई नास्तिक फिलास्फर अपनी दलीलों के लिए साइंस का सहारा लेता है। उसके अनुसार आधुनिक साइंसी दौर में खुदा वगैरा की बातें दकियानूसी करार पायी जाती हैं। जबकि सच्चाई ये है कि साइंस का गहराई से किया जाने वाला अध्ययन इंसान को खुदा के वजूद में यकीन रखने पर मजबूर कर देता है।


इससे पहले कि मै अपनी बात की शुरुआत करूं, एक नजर डालते हैं इमाम हज़रत अली इब्ने अबी तालिब (अ-स-) के अजीम खुत्बे पर जिसमें उन्होंने परवरदिगार के बारे में इरशाद फरमाया,


‘‘सम्पूर्ण तारीफें उस अल्लाह के लिए हैं जिस की तारीफ तक बोलने वालों की पहुंच नहीं। जिस की रहमतों को गिनने वाले गिन नहीं सकते। न कोशिश करने वाले उसका अधिकार चुका सकते हैं। न ऊंची उड़ान भरने वाली हिम्मतें उसे पा सकती हैं। न दिमाग और अक्ल की गहराईयां उस की तह तक पहुंच सकती हैं। उस के आत्मिक चमत्कारों की कोई हद निश्चित नहीं। न उस के लिए तारीफी शब्द हैं। न उस के लिए कोई समय है जिस की गणना की जा सके। न उस का कोई टाइम है जो कहीं पर पूरा हो जाये। उस ने कायनात को अपनी कुदरत से पैदा किया। अपनी मेहरबानी से हवाओं को चलाया। कांपती हुई जमीन पर पहाड़ों के खूंटे गाड़े। दीन की शुरुआत उस की पहचान है। पहचान का कमाल उसकी पुष्टि है। पुष्टि का कमाल तौहीद है। तौहीद का कमाल निराकारता है और निराकारता का कमाल है कि उससे गुणों को नकारा जाये। क्योंकि हर गुण गवाह है कि वह अपने गुणी से अलग है और हर गुणी गवाह है कि वह गुण के अलावा कोई वस्तु है। अत: जिस ने उस के आत्म का कोई और साथी माना उसने द्विक उत्पन्न किया। जिसने द्विक उत्पन्न किया उसने उसके हिस्से बना लिये और जो उसके लिए हिस्सों से सहमत हुआ वह उससे अज्ञानी रहा और जो उससे अज्ञानी रहा उसने उसे सांकेतिक समझ लिया। और जिसने उसे सांकेतिक समझ लिया उस ने उसे सीमाबद्ध कर दिया और जिसने उसे सीमित समझा वह उसे दूसरी वस्तुओं की पंक्ति में ले आया। जिस ने यह कहा कि वह किसी वस्तु में है उसने उसे किसी प्राणी के सन्दर्भ में मान लिया और जिसने यह कहा कि वह किसी वस्तु पर है उस ने और जगहें उस से खाली समझ लीं।


वह है, हुआ नहीं। उपस्थित है लेकिन आरम्भ से वजूद में नहीं आया। वह हर प्राणी के साथ है लेकिन शारीरिक मेल की तरह नहीं है। वह हर वस्तु से अलग है लेकिन शारीरिक दूरी के प्रकार से नहीं। वह कर्ता है लेकिन चेष्टा और उपकरणों पर निर्भर नहीं है। वह उस वक्त भी देखने वाला था जब कि सृष्टि में कोई वस्तु दिखाई देने वाली न थी। वह असम्बद्ध है इसलिए कि उसका कोई साथी ही नहीं है जिससे वह अनुराग रखता हो और उसे खोकर परेशान हो जाये। उसने पहले पहल सृजन का आविष्कार किया बिना किसी चिंतन की बाध्यता के और बिना किसी अनुभव के जिससे लाभ उठाने की उसे आवश्यकता पड़ी हो और बिना किसी चेष्टा के जिसे उसने पैदा किया हो और बिना किसी भाव या उत्तेजना के जिससे वह उत्सुक हुआ हो। हर चीज को उसके वक्त के हवाले किया। बेजोड़ वस्तुओं में संतुलन और समरूपता उत्पन्न की। हर वस्तु को भिन्न तबीयत और प्रकृति सम्पन्न बनाया। और इन प्रकृतियों के लिए उचित परिस्थितियां निर्धारित कीं।  (जारी....)



अगला भाग

18 comments: Leave Your Comments

  1. Mashallah, aap achha kam kar rehe hai Zeeshan bhai.

    ReplyDelete
  2. bahut hi badhia shuruaat hai, Allah aapko kamyabi ata farmae - ameen

    ReplyDelete
  3. डॉ.अयाज़ अहमदNovember 25, 2010 at 3:58 AM

    अच्छी पोस्ट

    ReplyDelete
  4. डॉ.अयाज़ अहमदNovember 25, 2010 at 4:03 AM

    ज़ीशान साहब आपने बहुत अच्छा लिखा । इस्लाम पर एतराज़ करने वाले अब कुछ कहने की स्थिति मे नही हैं

    ReplyDelete
  5. बढ़िया पोस्ट!

    ReplyDelete
  6. इस लेख की लम्बाई कुछ कम लग रही है जीशान जी जारी रखने की जगह यहीं लिख देते

    ReplyDelete
  7. Bahut achhi starting hai, post ko padhkar lagta hai agey or bhi kam ki jankari hogi

    ReplyDelete
  8. बहुत अछि शुरुआत की है, इसकी बहुत ज़रूरत थी.

    ReplyDelete
  9. बहुत-बहुत शुक्रिया जीशान जी

    ReplyDelete
  10. besak allah hi saare aalam ka maalik hai

    ReplyDelete
  11. बेहतरीन शुरुआत की है जीशान भाई... बहुत-बहुत मुबारक हो!

    ReplyDelete
  12. ज़ालिम कौन Father Manu या आज के So called intellectuals ?
    एक अनुपम रचना जिसके सामने हरेक विरोधी पस्त है और सारे श्रद्धालु मस्त हैं ।
    देखें हिंदी कलम का एक अद्भुत चमत्कार
    ahsaskiparten.blogspot.com
    पर आज ही , अभी ,तुरंत ।
    महर्षि मनु की महानता और पवित्रता को सिद्ध करने वाला कोई तथ्य अगर आपके पास है तो कृप्या उसे कमेँट बॉक्स में add करना न भूलें ।
    जगत के सभी सदाचारियों की जय !
    धर्म की जय !!

    ReplyDelete
  13. एक बेहतरीन लेख़

    ReplyDelete
  14. मुहम्मद चाँदNovember 27, 2010 at 7:45 AM

    जीशान भाई
    बेहतरीन लेख़

    ReplyDelete

Top of the Month

Follow by Email

Archive