background img

Latest

अल्लाह का वजूद – साइंस की दलीलें (पार्ट-6)

हालांकि ये बात सभी गतिशील वस्तुओं पर लागू होती है, लेकिन चूंकि इलेक्ट्रान की गति बहुत ज्यादा होती है और पोजीशन मापने की दूरियां बहुत ही छोटी यूनिट में होती हैं, इसलिए अनिश्चितता को अनदेखा नहीं किया जा सकता। तो फिर जब हम इलेक्ट्रान की गति और पोजीशन से सम्बंधित कोई कथन देते हैं तो वह वास्तविक नहीं होता। यानि हम कभी वास्तविक निष्कर्ष नहीं निकाल सकते हैं। और न ही किसी को बता सकते हैं। इस प्रकार साइंस में एक और कण्टराडिक्शन के दर्शन हुए।


रेडियोऐक्टिविटी कुछ पदार्थों का विशेष गुण है। इसके अनुसार वे पदार्थ कुछ किरणें छोड़ते हैं जिन्हें अल्फा बीटा और गामा किरणें कहते हैं। ये किरणें पदार्थ के नाभिकों से क्षीण नाभिकीय बलों के कारण पैदा होती हैं। प्रत्येक रेडियोऐक्टिव पदार्थ एक निश्चित समय पर अपनी प्रारम्भिक मात्रा का आधा रह जाता है। क्योंकि रेडियोऐक्टिव किरणें निकलने से उस पदार्थ के परमाणु दूसरे पदार्थों के परमाणुओं मे बदलते रहते हैं। उस निश्चित समय को उस पदार्थ की अर्द्ध आयु कहते हैं । यानि अगर किसी रेडियोऐक्टिव पदार्थ की अर्द्ध आयु दस मिनट है और प्रारम्भ में उसकी 100 ग्राम मात्रा ली जाये तो दस मिनट बाद उसकी मात्रा 50 ग्राम हो जायेगी। और पुन: दस मिनट बाद उसकी मात्रा 25 ग्राम होगी। इस प्रकार अगर देखा जाये तो वह रेडियोऐक्टिव पदर्थ कभी भी पूरी तरह नष्ट होकर दूसरे पदार्थ में नहीं बदलेगा। क्योंकि किसी भी अशून्य संख्या का आधा कभी जीरो नहीं होता।


लेकिन उपरोक्त रेडियोऐक्टिव पदार्थ परमाणुओं से मिलकर बना है जो संख्या में निश्चित रहेंगे। भले ही उनकी संख्या बहुत ज्यादा हो। एक रेडियोऐक्टिव कण अल्फा या बीटा निकलने का मतलब है कि वह पूरा परमाणु नष्ट होकर किसी दूसरे पदार्थ के परमाणु में बदल गया। इस प्रकार रेडियोऐक्टिव विघटन में पदार्थ के परमाणु एक के बाद एक नष्ट होते चले जायेंगे। और अन्त में पदार्थ का एक भी परमाणु नहीं बचेगा। अर्थात एक समय आयेगा जब वह पदार्थ पूरी तरह समाप्त हो जायेगा। और हमारा उपरोक्त अर्द्ध आयु का नियम गलत सिद्ध हो जायेगा। जो कि एक कण्टराडिक्शन है।


कुछ लोग यह कह सकते हैं कि हो सकता है अन्त में बचने वाला परमाणु कभी नष्ट न हो। लेकिन हम इसे यदि मान भी लें तो भी अर्द्ध आयु का नियम गलत हो जायेगा। क्योंकि पुन: दस मिनट बीतने के पश्चात उस परमाणु को भी आधा होना चाहिए और परमाणु के आधा होने का कोई अर्थ नहीं। क्योंकि वह किसी तत्व का सूक्ष्मतम कण होता है।



पिछला भाग
अगला भाग

3 comments: Leave Your Comments

  1. Its very informative Mr Zeeshan...now with this website more and more peoples can know understand the real concept of ISLAM which is very much required now a days scenario...Well done KEEP IT UP

    ReplyDelete
  2. अल्लाह का वजूद और उसकी कुदरत की निशानियाँ हर चीज़ मौजूद है बस उसे समझने की ज़रूरत है

    ReplyDelete

Top of the Month

Follow by Email

Archive