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क्या धरती पर्वतों के कारण से स्थिर है?

वैज्ञानिक पर्वतों के महत्व को समझाते हुए कहते हैं कि यह पृथ्वी को स्थिर रखने के लिए महत्त्वपूर्ण हैं:

'पर्वतों में अंतर्निहित जड़ें होती है. यह जड़ें गहरी मैदान में घुसी हुई होती हैं, अर्थात, पर्वतों का आकार खूंटो अथवा कीलों की तरह होता है. पृथ्वी की पपड़ी 30 से 60 किलोमीटर गहरी है, यह seismograph (स्वचालित रूप से तीव्रता, दिशा रिकॉर्डिंग और जमीन की हलचल की अवधि बताने वाले उपकरण) से ज्ञात होता है. इसके अलावा इस मशीन से यह ज्ञात होता है कि हर एक पर्वत में एक अंतर्निहित जड़ होती है, जो अपनी अंतर्निहित परतों की वजह से पृथ्वी की पपड़ी को स्थिर बनाती है, और पृथ्वी को हिलने से रोकता है. अर्थात, एक कील के समान है, जो लकड़ी के विभिन्न टुकड़ों को एकजुट रखे हुए है.


ईश्वर कुरआन में कहता है:

क्या ऐसा नहीं है कि हमने धरती को बिछौना बनाया और पहाडो को खूंटे? [78:6-7]

"Have We not made the earth as a wide expanse. And the mountains as pegs?" [The Holy Qur'an, Chapter 78, Verse 6-7]

Isostacy: mountain masses deflect a pendulum away from the vertical, but not as much as might be expected. In the diagram, the vertical position is shown by (a); if the mountain were simply a load resting on a uniform crust, it ought to be deflected to (c). However because it has a deep of relatively non-dense rocks, the observed deflection is only to (b). Picture courtesy of Building Planet Earth, Cattermole pg. 35

18 comments: Leave Your Comments

  1. डॉ.अयाज़ अहमदDecember 9, 2010 at 4:15 AM

    अच्छी पोस्ट

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  2. डॉ.अयाज़ अहमदDecember 9, 2010 at 6:08 AM

    वैज्ञानिक पर्वतों के महत्व को समझाते हुए कहते हैं कि यह पृथ्वी को स्थिर रखने के लिए महत्त्वपूर्ण हैं:
    ‘पर्वतों में अंतर्निहित जड़ें होती है.

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  3. Waah badhia post hai. Pehle hamarianjuman me padh chuka hu.

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  4. Quran ki ek-ek bat Vigyan se bhi sach sabit hai, balki Quran to Vigyan se bahut aage hai, ya ye kahen ki Vigyan Quran ke samne kuchh bhi nahi, sirf allah ka diya gyan hai.

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  5. इस मशीन से यह ज्ञात होता है कि हर एक पर्वत में एक अंतर्निहित जड़ होती है, जो अपनी अंतर्निहित परतों की वजह से पृथ्वी की पपड़ी को स्थिर बनाती है, और पृथ्वी को हिलने से रोकता है. अर्थात, एक कील के समान है, जो लकड़ी के विभिन्न टुकड़ों को एकजुट रखे हुए है.

    ईश्वर कुरआन में कहता है:

    क्या ऐसा नहीं है कि हमने धरती को बिछौना बनाया और पहाडो को खूंटे? [78:6-7]

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  6. क्या खूब जानकारी दी शाहनवाज़ भाई मज़ा आ गया

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  7. कमाल है कहाँ से ढूंड कर लाए?

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  8. बदरूद्दीन सिद्दीकीDecember 9, 2010 at 7:11 AM

    माशा अल्‍लाह बहुत अच्‍छी जानकारी दी है

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  9. Jazakallah, very true

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  10. डॉ.अयाज़ अहमदDecember 9, 2010 at 7:49 AM

    विश्व विख्यात दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना मरगूबुर्रहमान का बुधवार को बिजनौर में इंतकाल हो गया। वह 96 वर्ष के थे। देर शाम उन्हें देवबंद में सुपुर्द-ए-खाक
    http://drayazahmad.blogspot.com/2010/12/darululoom-deoband-chanceller.html

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  11. Superb Post! Well done mashallah... keep it up!

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  12. इन्नालिल्लाही व इन्ना इलैही राजिउन.



    निहायत ही दुःख भरी खबर है अयाज़ साहब. अल्लाह, ता`आला उन्हें जन्नत-उल-फिरदौस में आला मक़ाम अता फमाए!

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  13. Lekin kuch log ye bhi kahte hain ki parwat to bad main bane hain

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  14. बहुत अच्छे शाहनवाज़ जी.

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  15. तारकेश्वर भाई, बाद में बने या पहले इससे क्या फरक पड़ता है? बात यह है की बने तो? और बिलकुल वैसे ही जैसा कुरान में बयान किया गया है. अक्सर मैंने लोगों को इस आयत पर विज्ञान की नज़र से शक करते हुए देखा है. आज शाहनवाज़ भाई ने इसका जवाब देकर एक बहुत ही खूबसूरत तरीके से उन सवालो का जवाब दिया है, जो की तारीफ के काबिल है. जो बात गलत है मैं उसे गलत कहता हु और जो बात तारीफ के काबिल है उसकी तारीफ हमें करनी ही चाहिए. क्या इस आर्टिकल को पढ़कर आपको ऐसा नहीं लगता?

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  16. एक ज्ञानवर्धक पोस्ट

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  17. dosto ek post aur he jo discovery channel pe dekhi jisme scien.kahte he ki paani kisi dusre taare se aaya he aur quran me es baat ki pusti he lekin muje sureh/aayat note nahi kiya aap se tawwajo chahuga

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