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अल्लाह का वजूद – साइंस की दलीलें (पार्ट-11)

यहां एक प्रश्न और उठता है कि कब कोई आत्मा या रूह मनुष्य के रूप में जन्म लेती है और कब किसी अन्य प्राणी के रूप में? तो इसका जवाब ये है कि यह उस आत्मा की क्षमता पर निर्भर करता है कि वह मनुष्य रूप में जन्म लेने के काबिल है या मछली या अन्य किसी कमतर प्राणी के रूप में। लेकिन क्षमता की जाँच तो जन्म के बाद होती है फिर जन्म से पहले कैसे इसका निर्धारण कर लिया गया? यहां एक बार फिर हमें अल्लाह के बारे में अन्य प्राणियों से अलग करके सोचना पड़ेगा। हर प्रकार का ज्ञान अल्लाह से जुड़ा हुआ है। उसका ज्ञान समय पर निर्भर नहीं है। क्योंकि समय को भी उसी ने बनाया है। जो घटनाएं हो चुकी हैं, उसका भी ज्ञान उसे है और जो घटनाएं घट रही हैं या घटने वाली हैं वह भी उसके ज्ञान में हैं। हों सकता है यह कथन कुछ लोगों को विरोधाभासी प्रतीत हो कि घटना घटने से पहले ही उसके बारे में जानकारी हो जाये। लेकिन इसे बहुत आसानी से समझा जा सकता है।


उदाहरण के लिए मान लिया कि कोई पुच्छल तारा हमारे सौरमंडल से कुछ दूरी पर गतिमान होकर तेजी से हमारी पृथ्वी पर आ रहा है। पृथ्वी के वैज्ञानिकों द्वारा निर्मित उपकरण उसे देखेंगे, उसका अध्ययन करेंगे और आंकड़ों के विश्लेषण के बाद उसे बता देंगे कि यह पुच्छल तारा ठीक छह महीने बाद ज्यूपिटर ग्रह से टकरा जायेगा। यह किस प्रकार हुआ? कैसे हमने भविष्य में घटी घटना का पूर्व ज्ञान प्राप्त कर लिया, स्पष्ट है कि अपने ज्ञान के आधार पर और उन उपकरणों के आधार पर जो हमने अपने ज्ञान का प्रयोग करके बनाये।


मनुष्य के पास बहुत ही सीमित ज्ञान है। यह सीमा इसी से अनुमानित है कि हर वर्ष हजारों की संख्या में रिसर्च पेपर विभिन्न देशों में प्रकाशित होते हैं और मनुष्य के ज्ञान में वृद्धि करते हैं। इस प्रकार ज्ञान की कोई सीमा नहीं। उस असीमित ज्ञान भंडार के समुन्द्र से कुछ बूंदें लेकर मनुष्य ने ऐसे उपकरण बना लिये जो छह महीने बाद या एक वर्ष बाद घटने वाली घटना को पहले से बता देते हैं। तो अब उस महाशक्ति जिसके पास असीमित ज्ञान है, के लिये ये सोचना कि जब घटना हो जाये तब उसे ज्ञान हो, बिल्कुल अक्ल से परे है।


मनुष्य तो कई बार उस घटना से भी अंजान रहता है जो बहुत पहले घट चुकी होती है। और इसमें समय और दूरी बहुत बड़ा रोल अदा करते हैं। मान लिया कि इस यूनिवर्स में पृथ्वी से दस हजार प्रकाश वर्ष दूर किसी तारे में विस्फोट होता है। उस विस्फोट की रौशनी जब तक पृथ्वी पर पहुंचेगी, पृथ्वी पर मानव की कई पीढ़ियां गुजर चुकी होंगी।


जबकि खुदा टाइम और दूरी के बंधनों से आजाद है। किसी घटना की खबर उस तक पहुंचने के लिए कोई रुकावट नहीं। भले ही वह घटना ‘फ्यूचर टाइम’ में हो। यहां मैंने पास्ट टाइम का इस्तेमाल नहीं किया। क्योंकि खुदा हमेशा से है इसलिए उससे पहले घटना होने का सवाल ही नहीं उठता।


तो इस तरह अल्लाह और उसके बन्दों से सम्बंधित विरोधाभासों को दूर किया जा सकता है। उपरोक्त जिक्र को यहीं समाप्त करते हुए अगले कन्टराडिक्शन पर आते हैं। जो नास्तिकों की अन्य मजबूत दलील हैं। इसमें अल्लाह को गुणों से भरपूर बताया गया है। तो फिर अवगुण कहां गये सारे? क्या उन्होंने दूसरे खुदा की शरण ले ली? यानि बुराईयों का खुदा?


उपरोक्त एतराज में भी मनुष्य की सीमित सोच का पता चलता है। क्योंकि हम आदी हो गये हैं अपनी बनायी कसौटी पर हर चीज को परखकर देखने के। हमने अपने आसपास देखा और पाया कि हर चीज का एक निगेटिव है। आग है तो साथ में पानी भी है। प्रेम के दर्शन होते हैं तो कहीं घृणा के। इलेक्ट्रिक करेंट के चालक मौजूद हैं तो सुचालक भी। अगर और गहराई में जायें तो इलेक्ट्रान का एण्टी कण पाजिट्रान मौजूद है। प्रोटान का एण्टी कण एण्टी प्रोटान भी पाया जाता है। ये दोनों जब एक दूसरे से टकराते हें तो नष्ट हो जाते हैं। यह कल्पना भी की गयी है कि जिस प्रकार पदार्थ इस यूनिवर्स में अस्तित्व रखता है उसी तरह उसका एण्टी मैटर (विपरीत पदार्थ) भी इसी यूनिवर्स में मौजूद है।


पदार्थ और विपरीत पदार्थ जब एक दूसरे से टकराते हैं तो नष्ट हो जाते हैं। और अपार ऊर्जा की उत्पत्ति होती है। इस प्रकार देखा जाये तो हर वस्तु और हर गुण अपना एक एण्टी जरूर रखता है। क्रोध का ख़ुशी है तो उत्साह का हताशा । स्पष्ट है कि फिर खुदा का भी एक एण्टी खुदा होना चाहिए। इस प्रकार अगर खुदा न्यायप्रिय है तो वह अन्याय प्रिय। अगर खुदा ज्ञानी है तो वह अज्ञानी होना चाहिए। अगर खुदा रहम करने वाला है तो वह अत्याचार करने वाला होना चाहिए।


लेकिन इस अवलोकन में हम ये भूल जाते हैं कि खुदा एक है और सृष्टि की रचना शून्य से हुई है। दूसरी बात ये कथन कि ‘अल्लाह गुणों का मजमुआ है’ गलत है। वास्तव में अल्लाह से पूरी तरह मिले हुए हैं गुण। जिस तरह चमकना तारों का गुण है लेकिन चमक को तारा नहीं कहा जा सकता। इसलिए गुणों के विपरीत अवगुण तो हो सकते हैं लेकिन खुदा के विपरीत एण्टी खुदा नहीं हो सकता।


सवाल उठता है कि फिर सृष्टि में क्यों हर वस्तु का एण्टी पाया जाता है? तो इसके लिए जैसा कि ऊपर कहा गया है कि सृष्टि की रचना शून्य से हुई है। अगर शून्य को विभाजित करें तो निगेटिव और पाजिटिव मिलते हैं। इसी तरह बराबर संख्या में निगेटिव और पाजिटिव मिलने से शून्य मिलता है। जैसे माइनस फोर और प्लस फोर का योग जीरो होता है। एक इलेक्ट्रान और पाजिट्रान के टकराने पर जीरो मैटर बन जाता है। इसी तरह जीरो मैटर यानि दो गामा फोटॉनों के मिलने पर इलेक्ट्रान और पाजिट्रान की पैदाइश होती  हैं।


ठीक इसी नियम पर सृष्टि का निर्माण हुआ। निर्माण का यह सिद्धान्त कुछ कुछ बिग बैंग से मिलता है। प्रारम्भ में केवल एक बिन्दु था विमाहीन। न तो द्रव्यमान था, न ऊर्जा और न समय। फिर एक विस्फोट हुआ यानि बिग बैंग। इस विस्फोट से पदार्थ ऊर्जा और समय की रचना हुई। यानि ये सब कुछ शून्य से उत्पन्न हुआ। स्पष्ट है कि इनमें से हर चीज अपना निगेटिव रखेगी तभी शून्य का उपरोक्त नियम लागू हो सकता है।


अल्लाह के लिए इस तरह का कोई नियम लागू नहीं होगा। क्योंकि वह शून्य से पैदा नहीं हुआ है। वह सदैव से एक रहा है और सदैव रहेगा। यहां इस बात की भी दलील मिल गयी कि वह सदैव से एक रहा है और सदैव रहेगा। क्योंकि वक्त के साथ वही बदलता है जो वक्त पर निर्भर होता है। वक्त बीतने के साथ प्राणी के साँसों की डोर नाजुक होती जाती है और एक वक्त आता है जब यह डोर टूट जाती है। चट्‌टानें वक्त के साथ टूटती रहती हैं और फिर पूरी तरह बिखर जाती हैं। लेकिन हम अगर उस महाशक्ति के बारे में विचार करें जिसने स्वयं वक्त की रचना की है, स्पष्ट है कि उसका अस्तित्व टाइम का मोहताज नहीं रह गया। और जब वह टाइम का मोहताज नहीं रह गया तो न तो उसके जन्म का कोई टाइम होगा और न उसके समाप्त होने का कोई टाइम। वह हमेशा से है और हमेशा मौजूद रहेगा।



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